Sunday, 28 January 2018
मेरी पूर्व पीढ़ी
Wednesday, 24 January 2018
इतिहास की दुहाई??? सारे रजवाड़े, रियासते तो अंग्रेजो के तलवे चाटते थे
बॉलीवुड की सबसे महंगी फ़िल्म पद्मावती।
हाँ हो सकता है कि 1 साल पहले जयपुर में हुए फ़िल्म के डायरेक्टर संजय लीला भंसाली के साथ जो हुआ उसके बाद स्क्रिप्ट बदली है।
वाकई हम ये मानते है कि जो त्याग बलिदान और मातृभूमि के लिए जिन विरो ने खून बहाया उसे पर्दे पर नकारात्मक छवि के रूप में ना प्रदशित किया जाये।
यहां बात पद्मावती जैसी सावित्री रूपा रानी की है जिसने अपने देह को बलिदान कर दिया पर विदेशी आक्रांता को अपना शरीर भेंट नही किया।
पद्मावती को मेवाड़ में माँ के रूप में पूजा जाता है। हर साल चितोड़ की महिलाये जोहर कार्यक्रम आयोजित करती है।
ये बात अलग है कि इतिहास में पद्मावती नामका कैरेक्टर कोई था कि नही पर पद्मावती राजपुताना की शान के रूप में जगजाहिर है।
पद्मावती की कहानी को कोई डायरेक्ट अगर पर्दे पर उतारे तो क्या हर्ज है??
कुछ लोग इस बात का मजाक बनाते है कि पद्मावती फ़िल्म का नाम बदलकर पद्मावत कर दिया गया तो सिगरेट को सगरेट बोलेंगे तो उसका निकोटिन गायब हो जाएगा क्या??
उन मूर्खो को ये बताना चाहूंगा कि मूवी मालिक मोहम्मद जायसी की किताब " पद्मावत' पर आधारित है इसलिये मूवी का नाम भी पद्मावत ही किया गया।
करनी सेना राजनीति खेल रही है। बिना ट्रेलर देखे ही विरोध करना शुरू कर दिया था।
लोकतंत्र में विरोध के लिये जगह है पर हिंसा के लिये नही। वो लोग भी धमकी दे रहे है जिनको फ़िल्म देखने का शोक नही।
ट्रेलर में ही आप देख लीजिये की खिलजी को एक राक्षस रूप में दिखाया गया जो जानवरो की तरह मांस खाता है, जबकि पद्मावती को एक पवित्र, सती सावित्री किरदार में दिखाया गया है। ट्रेलर से तो ऐसा लगता है कि राजपूत इस पर गर्व करेंगे पर राजपूतों ने इस पर गर्व की बजाय राजनीति की।
करनी सेना के महासचिव खुले आम बोलते है कि जो भी दीपिका की नाक काट कर लाएगा उसे 1 करोड़ रुपये दिया जाएगा। तब भी सरकार चुप रहती है।
दीपिका के कैरेक्टर पर हमला बोला जाता है तो भी सरकार चुप रहती है। कैरेक्टर पर उंगली क्यो भाई??
उसका कार्य है अभिनय करना और बाकी हिरोइन की तरह वो कभी किसी डायरेक्टर के सामने नग्न नही हुई है।
घूमर बजाने वालो को पीटो। सिनेमाघर को जलाओ। जो भी मूवी देखने जाय उनको बजाओ। ऐसा करके करनी सेना अपनी राजपुताना ताकत बता रही है??
आज तो हद ही हो गई जब गुरुग्राम में बच्चो से भरी स्कूल बस पर हमला किया। इनकी कायरता तो यहां दिखती है। इस पूरे वाकये में उन बच्चों का क्या दोष??
इनको लगा कि पूरे देश मे संगठन के नाम का प्रचार प्रसार और खोफ पैदा होगा पर इन्होंने ऐसी शर्मनाक हरकते कर देशभर में संगठन के लिए जो रेपुटेशन थी उसका नाश कर दिया।
पद्मावती का क्या है?? 4 स्टेट में नही चली तो क्या हुआ ।क्या विश्व के 70 देशों में भी कोई करनी सेना है??
क्या करनी सेना सुप्रीम कोर्ट और सेंसर से बढ़ी है??
ग़ांधी और बुद्ध के देश मे आम जनता और बच्चों को निशाना बनाना न्यायसंगत है??
हिन्दुओ के इतिहास से छेड़छाड़ का हवाला देने वालो सारे रजवाड़े, रियासते सब अंग्रेजो के तलवे चाटते थे। अगर उस वक्त अपनी क्षत्रिय ताकत दिखाते तो शायद आज भारत विश्वगुरु होता।
Saturday, 11 November 2017
मेरी एक कविता - मैं खो गया हूँ किसी मंजिल की तलाश में
मैं पथ को भूल गया, या चल रहा हूँ आस में
खुशी की तलाश में निकला था, खुशी को पीछे छोड़ आया।
मैं फिर भी चल रहा हूँ, उम्मीद को दबाये हुए।
पहचान बनाने निकला था, परछाई बन गया हुँ।
इतिहास बदलने निकला था, मासूम बन बैठा हूँ।
मैं कहाँ हुँ मुझे पता नही, मंजिल क्या है मुझे पता नही।
मैं भूल गया हूँ सबकुछ, पर इसमे कोई खता नही
हाँ नही कोई खता, मैं फिर भी डट रहा हूँ
समय काट रहा हूँ, या खुद कट रहा हूँ।
जिंदगी ने ऐसा मजाक बना दिया
भले मानुस को कठपुतली बना दिया
Sunday, 10 September 2017
इतने तत्वों को ढालकर वह पत्रकार कहलाता है
"
वह जनचेतना लाता है, वह पहाड़ो से टकराता है।
वह जागरण का प्रहरी, वह कुरुतियाँ मिटाता है।
वह समीक्षक वह संपादक वह सहयोगी वह प्रेषक है।
शिक्षकों का शिक्षक वह, बुद्धिजीवी विश्लेषक है।।
वह लोकनायक वह लोकगुरु, वह मर्करी कहलाता है।
इतने तत्वों को ढालकर वह पत्रकार कहलाता है।
वह विचार भावना का सारथी, उसमे घटनाओं की सीरत है।
वह प्रगति शील, वह संतोषी वह निर्भीकता की मूरत है।
वह ज्ञानी है वह कर्मयोगी, वह प्रतिभा का चेहरा है।
वह भ्रमणशील वह अडिग है वह साहसी कुशल चितेरा है।
वह गुप्तचर वह वॉचडॉग, वह परिवर्तन को लाता है।
इतने तत्वों को ढालकर वह पत्रकार कहलाता है।।
वह सूंघता है, वह खोजता है, वह खोदता है, वह लिखता है।
वह संवारता है वह पकाता है, वह सजाता है, वह बनाता है।
अर्थ समाज राजनीति से सम्बद्ध, दर्शन व इतिहास का ज्ञाता है।
वह लक्ष्यनिष्ठ वह सत्यव्रती, वह नेताओं का नेता है।
वह टीकाकार, वह सलाहकार, वह साहित्यकार कहलाता है।
इतने तत्वों को ढालकर वह पत्रकार कहलाता है।। "
Friday, 8 September 2017
गाली वाली कांग्रेस
ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव है। लेकिन इससे पहले ये मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके है।
आज इनको मैं क्यों याद कर रहा हूँ??
क्योंकि आज इन्होंने कांग्रेस के लिये दायित्वपूर्ण कार्य किया।
दरअसल इनको मैं इसलिये पसंद करता था कि ये अपनी पार्टी के लिए जमकर प्रचार प्रसार करते है। सोशल साइट ओर हमेशा इनकी उपस्थिति रहती है। राहुल ग़ांधी के बाद यही है वो जो असफल प्रयास के पर्याय बन है। ये पोसिटिव कमेंट कम और सरकार की बुराई में ज्यादा लिप्त रहते है।
2014 में ये विवादों में आये थे जब इनकी एक किसिंग तस्वीर वायरल हुई थी, पत्रकार अमृता सिंह के साथ। ( घोड़े को नही मिल रही घास , गधे कहा रहे च्वयनप्रास 😂)
और शायद वो भी एक वजह बनी भारतीय कांग्रेस के पतन की। 300 से 44 पर पहुंचने की। 😀😀
उसके बाद फिर विवादों में आये जब अंतरास्ट्रीय आतंकी हाफिज सईद को "जी' लगाकर संबोधित किया।
फिर तो इनका दिमाग अब ऐसा हो गया कि BJP इनको जहर लगने लगी। दिन रात ये बस bjpऔर आरएसएस के ख़िलाफ़ बयानबाजी करते रहते है।
आज क्या हुआ??
एक ट्वीट को रिट्वीट कर दिया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुटिया कहा गया है।
फिर क्या था , चहुँ ओर इनकी आलोचना शुरू हुई। राष्ट्रवादी पत्रकार रोहित सरदाना ने अपने शो " ताल ठोक के ' में इस मूददे को उठाया। फिर "आर पार ' में अमिश देवगन ने भी इस पर डेबिट की।
ट्विटर पर भी #gaaliwalicongress का ट्रेंड चला।
बात यह है कि जब विरोध ज्यादा बढ़ा तो ये भड़कते हुए ट्वीट करते है कि bjp मुझे संस्कार ना सिखाये। ' एक पत्रकार ( गौरी लंकेश) को कुतिया कहने वाले को तो प्रधानमंत्री फोलो करते है। और ग़ांधी को गाली देते है।
वैसे दिग्विजय सिंह जी। ग़ांधी को गाली देना भी अब सम्मान की बात है। 😂😂
और आपके संस्कार की क्या बानगी दे। आप दुर्दांत हत्यारे ओसामा को जी कहके संबोधित करते है। हाफिज सईद को हाफिज साहब बोलते है। देश के pm को गुंडा ओर चुटिया बोलते है। इससे अच्छा संस्कार क्या होगा??
वो कांग्रेसी ही है ना मणिशंकरअय्यर जो पाक में बैठ कर हिंदुस्तान को मिटाने की सुपारी दे कर आया था ।
अलगाववादियों के यहां ये दावत उड़ाते हैं।
महिला का सम्मान करना हर हिंदुस्तानी का फर्ज बनता है साहब।
लेकिन आतंकी ओसामा बिन लादेन को ओसामा जी कहना कौन सिखाता है।
वोट के लिए ओसाम जी wow...
असल मे 2014 के बाद कॉंग्रेस का इतनी तेजी से शीघ्र पतन हुवा कि उस के नेता शर्मनाक गाली देने लग गये,
यही है बौद्धिक दिवालियापन। 😂😂
ओर मजे की बात ये है कि राहुल के साथ-साथ दिग्विजय सिंह भी 'कांग्रेस मुक्त भारत अभियान' में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं।
सांसद हो के ऐसी बाते करता है, सामाजिक मूल्यों को ताक पर रख दिया शर्म कर दिग्विजय।
सही बताऊ तो इनका दोष नही हैं ये उनके DNA में हैं ये उनके वंसज हैं जिसने 1857 की क्रांति में अंगेजो का साथ दिया था।
पति,पत्नी में ज्यादा उम्र का फासला नही होना चाहिए साहब, नही तो वो अपनी frustration प्रधानमंत्री को गाली दे कर निकालता है।😂😂
ओर आपकी पार्टी के बारे में क्या कहूँ... Congress पार्टी मे सिर्फ नेता बचे है ईन्हे वोट देने वाले नहीं ये खटारा बस टाईप की पार्टी है अब देश को ईससे आजादी चाहीये! आज के समय मे कांग्रेस खुद में एक गाली है। मैं तो बोलता हूं किसी को राहुल ग़ांधी बोल कर देखो, वो भड़क न जाये तो कहना😂😂।
मोदी जी को गाली देते देते काग्रेस ने देश का प्रधानमंत्री बना दिया।अब क्या चाहती कि काग्रेस का अस्तित्व ही खत्म हो जाय ।
जिंदगी भर एक ही परिवार की दलाली करने वाले Pigविजय से और क्या उम्मीद की जा सकती है।
रही बात Bjp की। तो ध्यान दीजिये।
BJP ने दयाशंकर को 1 अभद्र टिप्पणी पर पार्टी से निकाल दिया
वही कांग्रेस PM समेत देश की जनता को गाली देने वाले pigविजय की पीठ ठोक रही है।
क्या कहूँ साहब।
गाली खाने लायक लोग
आज गाली दे रहें हैं
इसे ही कहते हैं सबका विकास 😀😀 ।
Wednesday, 6 September 2017
गौरी लंकेश। must read #starlingjyoti_opinion
गौरी लंकेश की हत्या भारतीय पत्रकारिता पर करारा तमाचा है। हमे सोचना चाहिए कि लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर ये हमला कहाँ तक न्याय संगत है। इसके विरोध में आवाज उठानी चाहिए, उठनी चाहिए, उठती रहेगी.. आइये हम शोक उत्पन्न करे क्योंकि एक पत्रकार की हत्या हुई है। लेकिन पत्रकारिता का दूसरा नाम निष्पक्षता भी है। क्या हम गौरी लंकेश को निष्पक्ष कहे?? जिसने JNU विवाद पर ट्वीट कर कहा था कि कन्हैया मेरा बेटा है और तब तक रहेगा जब तक आरोप साबित नही हो जाते।
ये वही गौरी लंकेश है जो दिन भर 24 घंटे इसके दिमाग मे केजरीवाल की तरह RSS ओर BJP भरा रहता है। ये कभी पॉजिटिव नही लिखती बल्कि हर बार नफरत फैलाने वाले लेख लिखती है ।
मैं RSS का समर्थक नही हूँ पर एक बात है जो बताना चाहता हूं। केरल में RSS कार्यकर्ता की हत्या पर इसने ट्वीट किया था - " स्वच्छ केरलम '
समझ सकते है वो कोई पत्रकार नही बल्कि एक विचारधारा की समर्थक थी। गौरी लंकेश कि हत्या राष्ट्रवादी पत्रकारीता नहीं।एक पर्टीकुलर मावोवादी विचारधारा की पत्रकारीता करने वालों की हत्या है।
गौरी लंकेश हत्याकांड पर हमे भी उतना ही संवेदना और दुख है, जितना वामियों को नक्सली हमले मे शहीद 85 CRPF जवानो के लिए हुआ था।।
वो लंकेश जितना बड़ा राक्षस था उससे बड़ा विद्वान ,ब्राह्मण और सनातनी था ये सनातन विरोधी।
माननीय राहुल ग़ांधी कहते है कि सच को आवाज को दबाया नही जा सकता। पर शायद भूल गए कि कर्नाटक में इन्ही की सरकार है।
अभी तक तो पुलिस को भी नहीं पता कि गौरी लंकेश कि हत्या किसने कि,
लेकिन पप्पू ने पहले ही भाजपा को दोषी बना दिया
इसीलिए तो इसे पप्पू कहते हैं।
विडंबना देखिए कि #गौरी लंकेश को निष्पक्ष पत्रकार बताने वाले साथ में ये भी कह रहे हैं की उनकी हत्या उनके बीजेपी विरोधी लेखन की वजह से हुई है।
सबसे बड़ी बात - कब्रिस्तान में दफनाया गया है गौरी जी को।
आइये 2 मिनट का मौन रखे।
Monday, 4 September 2017
ताजमहल यात्रा
आगरा शहर उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरो में एक है । मुगल बादशाह के असीम प्रेम का प्रतीक ताजमहल के कारण आगरा मधुयामिनी मनाने (Honeymoon Desination) वालो के लिए आदर्श पर्यटक स्थल बन गया है, वैसे दुनिया भर के अधिकतर लोगो इच्छा होती है कि अपने जीवनकाल में इस खूबसूरत ताजमहल का एक दीदार अवश्य करे। भौगोलिक द्रष्टि से यह प्रदेश के पश्चिमी इलाके में यमुना नदी के किनारे बसा हुआ काफी बड़ा शहर है । आगरा शहर पश्चिम में राजस्थान और दक्षिण पर मध्य प्रदेश सीमा से घिरा हुआ हैं । आगरा को भारत के अधिकतर छोटे और बड़े शहरो से बखूबी जोड़ते है । अभी कुछ साल पहले निर्मित भारत का आधुनिकतम एक्सप्रेसवे छह लाइन यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway Agra - Greater Noida 165km ) ने दिल्ली को और नजदीक ला दिया है ।
ताजमहल जाते हुए रास्ते में एक चबूतरा है और उसके साथ ही पानी का एक छोटा सा कुंड है ! इस चबूतरे से ताजमहल काफ़ी नज़दीक दिखाई देता है, इसलिए सभी लोग यहाँ उठ-बैठ कर फोटो खिंचवा रहे थे ! हम लोगों ने भी इस चबूतरे पर बैठ कर कुछ फोटो लिए ! यहाँ से आगे बढ़े तो ताजमहल के नीचे वाले गलियारे में पहुँच गए, जहाँ ताजमहल जाने के दो रास्ते है ! बाईं ओर वाला रास्ता विदेशी पर्यटकों और गणमान्य लोगों के लिए है, हम जैसे साधारण पर्यटकों के लिए दाईं ओर से जाने वाला रास्ता है ! अब हम तो ठहरे आम नागरिक, बिना कुछ सवाल जवाब किए कहाँ मानने वाले थे, वहाँ खड़े एक सिपाही से प्रश्नों का सिलसिला शुरू कर दिया ! 2-3 प्रश्नों के जवाब तो उसने सरलता से दिए उसके बाद वो झल्ला पड़ा !
एक रूहानी सीकशिश है उसमे उसके पीछेबहती यमुना और उसकेऊपर वोह साफ़ चमकताहुआ आसमान उसे देखकरता लगता है की इंसानप्रदूषण जैसी चीज़ सेवाकिफ ही नही....जितनाइसे निहारो उतना कम....











