Saturday, 18 May 2019

भीड़ में खड़ा होना मकसद नही 😂😂 हद हो गई

ना इनको राजNiti की समझ.. ना इनकी ऐसी एक्टिंग रुचि की बॉलीwood में एंट्री मिले .. ना इनको ये पता की नो बॉल किसे कहते है, ना इनको मालूम कि शेयर बाजाR और सेंसेक्स क्या है... ना इनको मालूम कि 16 का vर्गमूल क्या होता है.. ना इनको पता कि नासा क्या बला है.. है इनकी फटीली आवाज.. IAS की फूल फॉर्म पूछने पर इनकी आंखे चौड़ी हो जाती है.. tiktok का तो नाम भी नही सुना होगा.. यूट्यूB इनका खोलो तो भोजपुरी डांस या प्रैंक वीडियो की भरमार मिलेगी। ability के नाM पर zeरो. 
80 रुपये का लाल स्टिक वाला चश्मा लगाकर, दोस्त की FZ बाइक पर बैठकर फोटो खिंचवाकर स्टेटस लगाएंगे -
" भीड़ में खड़ा होना मकसद नही है मेरा।
मुझे वो बनना है, जिसके लिए भीड़ बनी है '

घनश्याम तिवाड़ी। क्या से क्या हो गए देख देखते

सियासत किस ओर करवट लेती है, ये कल देखने को मिला। #घनश्याम_तिवाड़ी
कभी वो राष्ट्रवाद का प्रखर नेतृत्व करते थे। 
कभी वो RSS का प्रचार किया करते थे।
कभी वो राजस्थान में भाजपा के स्थापना करने वाले नेताओं में गिने जाते थे।
कभी वो आपातकाल में कोंग्रेस का विरोध करते थे, जेल जाने वालों में सबसे आगे रहते थे। 
कभी वो अशोक गहलोत को आंखे दिखाते थे।
कभी वो bjp के दिग्गज नेता कहलाते थे।
आज वो बदल गए। पलट गए। भटक गए। हट गए।

Ipl fever

IPL_Fever

Office से बसस्टॉप की दूरी 200 मीटर थी। इस दूरी पर 15 जने भागते नजर आए। कारण था KKR ओर Delhi के बीच के सुपर ओवर को देखना का। इस रोचक मुकाबले के रोचक सुपर ओवर ने दर्जनभर से ज्यादा कर्मचारियों को आफिस की दीवारो पर लगी LeD पर झांकने को मजबूर कर दिया। वक्त का पता ही नही चला कि बस भी जाने वाली है कि नही। बस के रवाना होने का टाइम fix 12:15 AM होता है। सुपर ओवर 12:14:40 पर खत्म हुआ। 20 सेकंड पहले। 
ये आईपीएल फीवर ही है जिसमें सुनसान आधी रात को चप्पलो ओर जूतों की दौड़ने की चटाक चटक की आवाज से सड़को ने शोर मचा दिया।

वही इतिहास रचता है जो दुनिया से अलग होता है

कल मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा कि ' जो दुनिया के अनुसार नहीं चलता वो मेंटल ही कहलाता है। उनके दिमाग की नसें गायब रहती है। ' 
#Sj_feeling
ये तो तय है कि दुनिया के सभी लोग एक जैसे नही होते। सबकी जीवनशैली अलग अलग होती है। कोई खुलकर सामने होता है तो कोई बन्द किताब सा सिकुड़ा होता है। ये दुनिया की प्रॉब्लम है की वो उनकी भावनाएं समझे बगैर उनका मूल्यांकन कर लेते है। अगर कोई लड़की 10 लड़को के बीच थड़ी पर चाय पी रही है तो वो मेन्टल नही, अपना खुलापन दर्शा रही है। जिस जिस ने युग को बदलने के लिए कुछ अलग किया लोगो ने उसे पागल घोषित कर दिया। अजीब हरकत करने वाला अल्बर्ट आइंस्टीन ही दुनिया का सबसे तेज़ दिमाग वाला इंसान बना बैठा है अब तक। दूरबीन के आविष्कारक गेलिलियो ने सबसे पहले ये कहा था कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है। इस सिद्धान्त पर उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुना दी। जो दुनिया के अनुसार चलेगा तो दुनिया खुश रहेगी। जो अलग है, यूनिक है, अलग सोचता है, अलग करता है तो दुनिया उसे मन्दबुद्धि घोषित कर देगी। एक बात और -
" वही इतिहास बनाते है जो सीरफरे होते है।
समझदार तो बस उन्हें किताबों में पढ़ते है। ' 🙏😘😘

किसी को कॉपी मत करो

तुम जैसे हो वैसे ही रहो। किसी को भी कॉपी मत करो। #jyoti_diary
जरूरी नही 10 के 10 लोग तुम्हे पसंद करें, 10 में से 3 करेंगे लेकिन वो 3 तुमको समझने वाले होंगे। वो झूठा ओर नकली दिखावटी चाहत नही दिखाएंगे। वो 3 तुम्हारे अपने होंगे। 
अगली बार अगर कोई तुमसे ये कहे कि मेरा व्यवहार ज्यादा है तुम्हारा कम है, तो उसको बोलना की इस नकली ओर स्वार्थी दुनिया मे व्यवहार रुतबे से बनता है। जिस दिन रुतबा खत्म, तुम व्यवहार शब्द का उच्चारण भी बंद कर दोगे। ओर व्यवहार नही, दिल मिलना चाहिए। कोई 1 का नाम बतादो जो विपरीत परिस्थितियों में तुम्हारे साथ खड़ा हो सके।

इसलिए तुम जैसे हो वैसे रहो। कॉपी मत करो। ओरिजिनल बने रहो। क्योंकि ओरिजिनल की कीमत डुप्लीकेट से ज्यादा होती है।

धारा 124 A

124(A) अंग्रेजो की देन है। ताकि कोई भी आजादी का दीवाना अगर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाये तो उस पर देशद्रोह का मुकदमा चला दिया जाता था, जिसकी सजा होती थी - ' मौत' 
आजादी के 70 साल बाद इस धारा का कोई मतलब नही रह जाता। सरकार के खिलाफ बोलना देशद्रोह नही होता। 124 A को खत्म करने का सीधा मतलब होगा आप सरकार के अन्याय के विरोध में बोल सकते है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इस धारा को बनाये रखना भारत पर शोभा नही देता। राजनाथ सिंह भी एक बार इसको हटाने की सिफारिश कर चुके है। अब ये कोंग्रेस के मेनिफेस्टो में शामिल हुआ है।

दक्षिणपंथी दक्षिण के लोग

दक्षिण के लोग 100 फीसदी दक्षिणपंथी होते है। यहां कदम कदम पर भारतीय संस्कृति देखने को मिलती है। यहां नवरात्रि में हर घर के बाहर की सड़के रंगोली से पीली हो जाती है। आज की ही बात बताऊं।
मैं मकान मालिक के पास गया ओर बोला ' अंकल रोज रोज की पानी नही आता है। मैं रूम खाली कर रहा हूँ। नहाना तो दूर पीने का पानी भी नही है।'
उसने हामी भर दी
जब मैं रूम खाली कर रहा था, तो उसने पूछा कि खाना खाया ??
मैं उनकी तरफ टेडी नजरो से देखने लगा। ऐसे लड़कर रूम खाली करने पर हमारे जयपुर में जूते पड़ते है। यहां फूल बरस रहे है। यकीन नही करोगे की दोनों पति पत्नी ने बड़े प्यार से मुझे बैठाकर खाना खिलाया। वो नही चाहते थे कि इन पावन 9 दिनों में कोई भूखा पेट घर छोड़कर जाए। वो नही चाहते थे कि किसी की आत्मा उनकी वजह से hurt हो।
उगादि ( दक्षिण में भारतीय नववर्ष) का त्योहार दक्षिण में ही मनाया जाता है। मैं खुश हूं कि मैं 1 दिन का इस संस्कृति का हिस्सा बना।