Saturday, 18 May 2019

एक महाशिवरात्रि ऐसी भी

कैसा feel होगा जब पूरे दिन भर आप किसी संस्था का हिस्सा बने हुए है ( duty time) . पूरे दिन भर भूखे पेट कर्तव्य निभा रहे है ( महाशिवरात्रि का व्रत).. भोले के दर्शन की चाह में रात साढ़े 8 से मंदिर के बाहर लंबी कतार में लगे है... ओर डेढ़ घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद जैसे ही मंजिल के बेहद करीब हो, मंदिर के दरवाजे बंद हो जाये ????

ऐसी ही ट्रेजिडी आज हुई। ऐसा लगा 32 gb का वीडियो डाऊनलोडिंग में था और 31.9 gb पर error दिखा दिया।
By the way हर हर महादेव 🙏🙄😘

शिक्षा से ज्यादा मशाला खबरों को तवज्जो देता है भारतीय मीडिया

बात 2 साल पुरानी है। #sj_feeling वो एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के पत्रकार रह चुके है। #NameHide 
एक विषय पर समाचार लिख रहे थे - 'शहर में दिखाई दिया पेंथर '
उन्होंने अपनी स्क्रिप्ट में पैंथर को हाईलाइट कम किया और जल, जमीन, ओर जंगल को ज्यादा हाईलाइट किया। वे टाइप कर रहे थे कि बाघ शहर की ओर मुंह क्यो मार रहे है। क्योंकि जंगल खत्म होने जा रहे है। जंगलो में पानी की कमी होती जा रही है इसलिए जंगली जीव शहर की ओर आ जाते है। " बस ये थी उनकी स्क्रिप्ट।
उन्होंने मुजसे भी इस विषय पर स्क्रिप्ट लिखने को बोला। वो देखना चाहते थे कि मैं क्या लिखता हूँ। ओर मेने लिखा -
" शहर के इस रिहायशी इलाके में पैंथर की खबर से खलबली मच गई। आनन फानन में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पैंथर की तलाश में जुट गई। पैंथर के पगमार्क से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। जाने कब खूंखार पंजे वाला बाघ किस पर हमला कर दे. नगर के बाशिन्दे अब तो घर से बाहर निकलने से भी दे रहे है।'

अब सवाल खड़ा होता है कि खबर किसकी ज्यादा चलेगी ??? 
मेरी स्क्रिप्ट में जल, जंगल, जमीन की बात नही थी। पानी और हवा की बात नही थी। यहां तड़क भड़क ज्यादा थी। मसाला ज्यादा डाला गया। क्योंकि लोगो को वो ही पसंद आता है। 
कहना ये चाहता हूं कि गलती भारतीय पत्रकारिता की नही है जो रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, जल, जंगल की बात करे। असल मे आज के जमाने के लोगो को ये सब चीज़े पसन्द ही नही आती है। वो नही पढ़ना चाहते ये ज्ञान की बाते। उनको बस मसाला चाहिए। चाहे खबर हो, मूवी हो या खाना। पत्रकारिता अब रुपयों पर टिकी है। यहां कोई स्वंतंत्रता आंदोलन नही हो रहा की जनजागृति करे। यहाँ TRP कि अंधी दौड़ पैसों के लिए है। क्योंकि अब ये व्यवसाय है।

कृपया अब कोई ना कहे कि पत्रकारिता का स्तर घट गया। स्तर घटने में भी जनमानस का बहुत बड़ा हाथ है। जल जमीन जंगल की बात करने पर कोई खबर को नही पढ़ता, नही सुनता। तो फिर काहे की चलेगी खबर। लोग खुद पसंद नही करते। चाहे चला कि देख लीजिए। देखते है कितने व्यूज मिलते है। मीडिया वालों के भी बाल बच्चे है, उन्हें ज्ञान नही बांटना। बल्कि खबर दौड़ानी है।

कॉन्फिडेंस से अंग्रेजी बोलती है मेरी माँ

भाषा अल्फाज ही नही, भावना भी है। देख ही लीजोये, अपनी टूटी इंग्लिश की बदौलत विदेशी मेहमानों का दिल जीत लेती है मेरी माँ। बेशक Where are you from की जगह ' You come where ' बोलती है। have u visited whole india की जगह you walking idhar udhar बोलती है। और कभी कभी तो कम्युनिकेशन के लिए कोई सेन्टेश याद नही आ रहा हो तो उनको मुह पे ही ' यु आर स्टुपिड ' बोलती है। कुछ भी हो पर वो एक परफेक्ट संवाद स्थापित करती है जंहा अल्फाज कम और अहसास ज्यादा होता है। पढ़े लिखे MBA, B.ed धारी लोगों में इतना कॉन्फिडेंस नही होगा जितना मेरी माँ में है। ये अपनी टूटी फूटी इंग्लिश की बदौलत विदेशी मेहमानों का सत्कार करती है.. लोग इन विदेशियों को एड्रेस बताने में भी कतराते है.. सोचते है कि इंग्लिश खराब हो जाये तो आस पास के लोग हम पर हसेंगे। ऐसे वक्त पर मेरी माँ एड्रेस ही नही बल्कि उनकी अच्छी फ्रेंड बन जाती है.. और वो मम्मी के साथ फोटो कैमरे में कैद किये बगैर नही जाते। पर्टिकुलर 4-5 सेन्टेश से ये अथितियों को बता देती है कि इंडियन दिल के बहुत अच्छे है।

भीड़ में खड़ा होना मकसद नही 😂😂 हद हो गई

ना इनको राजNiti की समझ.. ना इनकी ऐसी एक्टिंग रुचि की बॉलीwood में एंट्री मिले .. ना इनको ये पता की नो बॉल किसे कहते है, ना इनको मालूम कि शेयर बाजाR और सेंसेक्स क्या है... ना इनको मालूम कि 16 का vर्गमूल क्या होता है.. ना इनको पता कि नासा क्या बला है.. है इनकी फटीली आवाज.. IAS की फूल फॉर्म पूछने पर इनकी आंखे चौड़ी हो जाती है.. tiktok का तो नाम भी नही सुना होगा.. यूट्यूB इनका खोलो तो भोजपुरी डांस या प्रैंक वीडियो की भरमार मिलेगी। ability के नाM पर zeरो. 
80 रुपये का लाल स्टिक वाला चश्मा लगाकर, दोस्त की FZ बाइक पर बैठकर फोटो खिंचवाकर स्टेटस लगाएंगे -
" भीड़ में खड़ा होना मकसद नही है मेरा।
मुझे वो बनना है, जिसके लिए भीड़ बनी है '

घनश्याम तिवाड़ी। क्या से क्या हो गए देख देखते

सियासत किस ओर करवट लेती है, ये कल देखने को मिला। #घनश्याम_तिवाड़ी
कभी वो राष्ट्रवाद का प्रखर नेतृत्व करते थे। 
कभी वो RSS का प्रचार किया करते थे।
कभी वो राजस्थान में भाजपा के स्थापना करने वाले नेताओं में गिने जाते थे।
कभी वो आपातकाल में कोंग्रेस का विरोध करते थे, जेल जाने वालों में सबसे आगे रहते थे। 
कभी वो अशोक गहलोत को आंखे दिखाते थे।
कभी वो bjp के दिग्गज नेता कहलाते थे।
आज वो बदल गए। पलट गए। भटक गए। हट गए।

Ipl fever

IPL_Fever

Office से बसस्टॉप की दूरी 200 मीटर थी। इस दूरी पर 15 जने भागते नजर आए। कारण था KKR ओर Delhi के बीच के सुपर ओवर को देखना का। इस रोचक मुकाबले के रोचक सुपर ओवर ने दर्जनभर से ज्यादा कर्मचारियों को आफिस की दीवारो पर लगी LeD पर झांकने को मजबूर कर दिया। वक्त का पता ही नही चला कि बस भी जाने वाली है कि नही। बस के रवाना होने का टाइम fix 12:15 AM होता है। सुपर ओवर 12:14:40 पर खत्म हुआ। 20 सेकंड पहले। 
ये आईपीएल फीवर ही है जिसमें सुनसान आधी रात को चप्पलो ओर जूतों की दौड़ने की चटाक चटक की आवाज से सड़को ने शोर मचा दिया।

वही इतिहास रचता है जो दुनिया से अलग होता है

कल मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा कि ' जो दुनिया के अनुसार नहीं चलता वो मेंटल ही कहलाता है। उनके दिमाग की नसें गायब रहती है। ' 
#Sj_feeling
ये तो तय है कि दुनिया के सभी लोग एक जैसे नही होते। सबकी जीवनशैली अलग अलग होती है। कोई खुलकर सामने होता है तो कोई बन्द किताब सा सिकुड़ा होता है। ये दुनिया की प्रॉब्लम है की वो उनकी भावनाएं समझे बगैर उनका मूल्यांकन कर लेते है। अगर कोई लड़की 10 लड़को के बीच थड़ी पर चाय पी रही है तो वो मेन्टल नही, अपना खुलापन दर्शा रही है। जिस जिस ने युग को बदलने के लिए कुछ अलग किया लोगो ने उसे पागल घोषित कर दिया। अजीब हरकत करने वाला अल्बर्ट आइंस्टीन ही दुनिया का सबसे तेज़ दिमाग वाला इंसान बना बैठा है अब तक। दूरबीन के आविष्कारक गेलिलियो ने सबसे पहले ये कहा था कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है। इस सिद्धान्त पर उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुना दी। जो दुनिया के अनुसार चलेगा तो दुनिया खुश रहेगी। जो अलग है, यूनिक है, अलग सोचता है, अलग करता है तो दुनिया उसे मन्दबुद्धि घोषित कर देगी। एक बात और -
" वही इतिहास बनाते है जो सीरफरे होते है।
समझदार तो बस उन्हें किताबों में पढ़ते है। ' 🙏😘😘