Saturday, 2 November 2019

वर्ल्डकप सेमीफाइनल हारने के बाद का दुख

UPSC Exam फाइट करने के बाद Interview में फेल हो जाना, कुछ ऐसा हो रहा है। #sj_feeling
महज 2 मार्क्स से सरकारी नौकरी के लिए चूक जाना, कुछ ऐसा हो रहा है।
कुछ ऐसा हो रहा है, की जिसके नाम से धड़कन चलती हो वो हमें अचानक ब्लॉक कर दे।
कुछ ऐसा हो रहा है एवरेस्ट के नजदीक पहुंच गए, और तूफान आ जाये, और वापस लौटना पड़े।
कुछ ऐसा हो रहा है, 32 GB का वीडियो डाऊनलोड करे और 31.90 पर Error दिखा दे।
कुछ ऐसा की जिंदगी भर की यादें जिस लैपटॉप में हो उसकी हार्डडिस्क अचानक फॉर्मेट हो जाये।
कुछ ऐसा की कुम्भ के अंतिम स्नान के लिए जाने वाली ट्रेन छूट जाए।
क्रिकेट मेरे लिए खेल नहीं है। ये जुनून है। क्रिकेट मेरे खून में बसता है। इस हार को मैं पचा नहीं पा रहा। मैं धोनी के उस रनआउट को भुला नही पा रहा हूँ। लेकिन फिर भी मैं मेरे मुल्क के सभी खिलाड़ियों का सम्मान करता हूँ। मैं आग्रह करता हूँ उनको गाली नहीं दे। उन्होंने यहां तक पहुंचाया, वही बड़ी बात है।
अगर आपने उनके जीत पर जश्न मनाया है तो उनके बुरे वक्त पर भी साथ दीजिए।
हमारी टीम इंडिया सबसे बेहतरीन थी, है और रहेगी।
मैं केवल जीतने वाले भारत का प्रशंसक नहीं हूं। मैं टीम इंडिया का प्रशंसक हूं मैं अपनी टीम का समर्थन करूंगा चाहे जीत हो या हार।टीम इंडिया जीत जाती तो सर आंखों पर बैठा लेते हो, ओर हार जाती है तो कोई मौका नही चूकते हो नीचा दिखाने का और व्यंग करते हो वाह रे दोगले प्रशंसको ।

शिव का लिंग और सच्चाई

शिव निराकार है। उनका कोई आकार नहीं। जबकि शंकर का एक आकार है। #sj_feeling
शिव अनन्त है। शिव प्रारंभ है। जबकि शंकर शास्वत है।
Who the hell is asking that why you Why do you worship Shiva's penis।
Dear Sathi ! That is not panis.. वो लिंग नहीं ब्रमांड है।
शिव का आदि और अनंत नहीं है। वो परमब्रह्म है। वो ब्रह्मांड है। क्या ब्रह्मांड का कोई आकार होता है ???
नहीं ना। तो बस इसी वेदों और वेदांतो के अनुसार इसी ब्रह्मांड को एक लिंग मानकर पूजा जाता है।
Now You will be asking Why is the given name 'Ling' of this universe?
संस्कृत में लिंग का अर्थ होता है आकार। ब्रह्मांड को यह आकार दिया गया है।
अब सवाल रहा कि लिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है।
तो भईया। ऐसी बात है कि समुद्रमंथन के वक्त जो विष निकला उसको भगवान शंकर ने पीकर पृथ्वी पर फैलने से बचाया था। तब उनका कंठ नीला और शरीर गर्म हो गया था। तब सृष्टि ने उसको शांत करने के लिए लिंग पर पानी डाला तभी से अब तक जल चढ़ाने की परंपरा स्टार्ट हो गई।
सभी को सावन के दूसरे सोमवार की हार्दिक बधाई।

साउथ के कुत्ते भी चपाती नहीं खाते

रक्षाबन्धन पर बनाई गई पूड़ियों में से कुछ पूड़ियाँ शेष रह गई थी। सोचा किसी जानवर को डाल दूं। #hyderabad
यहां गाये तो बहुत कम दिखती है। दिखाई देते है तो कुत्ते।
चूँ-चूँ करके उन कुत्तों को बुलाया। 😌 तेलगु में कैसे बुलाते है मुझे नहीं पता। 
एक साथ 4 कुत्ते आ धमके। पूड़ी 3 और कुत्ते 4. यही कशमकश लगी रही कि कोई भी कुत्ता भूखा न जाये।
पहले एक कुत्ते को हाफ पूड़ी डालकर कर देखा। लेकिन उसने सिर्फ सूंघ कर ही इग्नोर कर दिया। 😱 मेरी आँखें तन गई कि इसको क्या हुआ। मेरे रूममेट ने बोला कि एक बार हाफ की जगह फूल पूड़ी डाल। लगता है नाराज हो गया 🙄
मेने वो भी किया लेकिन किसी भी कुत्ते ने पूड़ी नहीं खाई। 😲बाद में एक तेलगु अंकल से पता चला कि यहाँ के लोगो की तरह यहां के जानवर भी नॉनवेज और ज्यादातर चावल खाते है। 🙁 सच बता रहे हैं बड़ा गुस्सा आया। अरे यार कुछ भी खाना है खाओ। जानवर भी क्षेत्रवाद अपनाते है। गुण तो वही है जो नार्थ इंडिया के कुत्तों में है। 😣वहीं गाड़ी के पीछे 100 मीटर तक भागना, टायर पर पेशाब करना। दुम हिलाना। अजनबी को देखकर भोंकना।😏 लेकिन रोटी और पूड़ी नहीं खाएंगे। मैं सोच रहा हूँ चीन के कुत्ते मोमोज और चाउमीन से पेट भरते है 🙄🙄..

उनको दिव्यांग कहना जरूरी है क्या


#KBC की सीट पर अमिताभ के सामने जयपुर की वो महिला बैठी थी। जिसका बेटा दिव्यांग था। उसने बताया कि वो थिएटर में इसलिए फ़िल्म देखने नहीं जाती क्योंकि वहां बैठे लोगों को उसके बेटे से प्रॉब्लम होती है।
अमिताभ ने कहा क्यों ना अलग से ऐसी व्यवस्था की जाए कि ऐसे बच्चों को भी फ़िल्म देखने का अवसर प्राप्त हो। 
महिला ने बात काटी ओर बोली - सर। मैं सोच रही थी कि ऐसी व्यवस्था की जाए कि सभी लोगों के साथ मिलकर वो भी फ़िल्म देख सके। उनके लिए अलग से व्यवस्था करके तो हम उनको अलग थलग कर रहे है। उनको समाज का हिस्सा ही नहीं बना रहे है। उन्हें ये फील करवा रहे है कि वो असाधारण है। वो आम मनुष्य नहीं है।
अमिताभ अगले 5 सेकेंड तक सोचने पर मजबूर हो गए। उन्होंने कहा बात आपकी बिल्कुल ठीक है।
फिर बात चली दिव्यांग शब्द पर। अमिताभ ये वर्ड बार बार बोल रहे थे। 
इस बीच उस महिला ने एक बार फिर बोला - " सर इंसान है, इंसान रहने दीजिए ना। ये तो वही बात हो गई कि नारी या तो पैर की जूती बनती है या देवी। लेकिन को इंसान तो बनाता ही नहीं है। ऐसे ही दिव्यांग शब्द भी बहुत घातक है। हम फिर उनको असाधारण महसूस करवा रहे है। हम उनको बता रहे है की आप आम इंसान नहीं है। आप उस श्रेणी में नहीं आ सकते। 
ये शायद पहला मौका था जब अमिताभ सोचने पर मजबूर हो गए।

साहो का इससे घटिया रिव्यू नहीं मिलेगा 😊


साउथ में साहो का जबरदस्त क्रेज है। इतना कि प्रभास की फ़ोटो को फैन दूध से नहला रहे है। हर तरफ डाय हार्ड फैन।
इतना क्रेज देखकर आखिर मेने मूवी देखने की चेष्टा हासिल की। 😊
वो पहाड़ी से कूदता है। इससे पहले बेग फैंकता है। बेग उससे 10 मीटर आगे पहाड़ी से नीचे आ रहा है और जस्ट बेग के 10 मीटर पीछे वो। अब हमें ये बताएं कि गेलिलियो और न्यूटन ने ये गुरुत्वाकर्षण का रूल तो दिया था ना कि कोई भी वस्तु ऊंचाई से गिराए तो उसका वेग नियत रहेगा।
ऐसा इसलिए बोल रहा हूं कि क्योंकि थोड़ी ही देर बाद प्रभास उस बेग को पकड़ लेता है। सारी फिजिक्स का राम नाम सत्य। 😲
भाई ने इंजीनियरिंग की है लेकिन विज्ञान चकनाचूर इस मूवी में।🙁
रेस 3 को टक्कर देने वाली फिल्म है ये। पहली बार ऐसा हुआ कि मैं फ़िल्म खत्म होने का इंतजार कर रहा था। वही बात ' नाम बड़े दर्शन छोटे। ' अनाप सनाप गाने। हर दूसरे सीन में प्रभास नजर आता है। 😏
350 करोड़ लगे इस मूवी में। समझ नहीं आया खर्च कहाँ हुए?? हीरो हिंदी डायलॉग भी तेलुगु टोन में बोलता है। 😀
असल मे इस मूवी का नाम साहो की जगह 'सहो' होना चाहिए था। बस सहते रहो। 😭
This movie is only for prabhas die hard fan... Not for movie fan 😀
ओर हां। ये मूवी रिव्यू नहीं बल्कि मेरी फिलिंग है 😀🙏

निजी जीवन में भी पॉलिटिक्स

#mustRead #sj_feeling
पॉलिटिक्स एक गन्दी नाली है। जो गिरता है, कीचड़ से लथपथ हो जाता है। ये पॉलिटिक्स सत्ता की कुर्सी तक ही सीमित नहीं है, हमारे निजी जीवन में भी देखने को मिलेगी। उन लोगों से दूरियां बना लेनी चाहिए जो आज आपके सामने पॉलिटिक्स खेल रहे है कल उनके सामने खेलेंगे।
दसअसल गुस्सा उन पर नहीं आता जिनसे आपके मतभेद हुए है। मतभेद होते रहते है। जीवन का अभिन्न अंग है। मन भेद नहीं होना चाहिए। हाँ तो मैं क्या बता रहा था..
हाँ.... गुस्सा उन पर नहीं आता जिनसे मतभेद हुए है, गुस्सा उन पर आता है जो 2 लोगों की लड़ाई में पड़कर इधर उधर की बाते करते है। यहां तक कि पुरुष भी इनमे शामिल है। आपके सामने उनकी बुराई करेंगे और उनके सामने आपकी।
जिन लोगों के मतभेद हुए है वो तो साल दो साल बाद फिर से हाय हेलो कर सकते है। नादानियाँ भुलाकर। लेकिन क्या उनको भुला दिया जाए जिन्होंने एक पक्ष की ही सुनी और दूसरे पक्ष के बारे में अनाप सनाप मनगढंत बाते बनाकर जज करते है। बिना किसी तथ्य के। अगर आप उस बन्दे को सच मे अपना दोस्त मानते है तो आप कैसे किसी को बिना किसी लॉजिक के गलत ठहरा सकते है। बिना उसकी बात सुने।
ऐसे पॉलिटिक्स करने वाले को अपनी जिंदगी से निकाल देना चाहिए। वो स्वार्थी होते है। जिधर पलड़ा भारी दिखा उधर घूम जाते है। ऐसे पॉलिटिक्स करने वाले लोगो के कॉन्टेक्ट आपकी फ़ोन बुक में नहीं रहनी चाहिए।
धन्यवाद।
नोट : फिलिंग है, मन किया तो लिख दिया। कोई कमेंट में ये ना पूछे कि 'क्या हुआ' ? 😀😀

किसी के बारे में गलत धारणा बनाने से पहले सोचे

'वो बहुत घटिया लड़की है या वो बहुत वाहियात आदमी है। '
हमें चंद सेकेंड नहीं लगते किसी के बारे में परसेप्शन बनाने में। #sj_feeling
हर इंसान किसी के लिए अच्छा तो किसी के लिए बुरा होता है। कुछ लोग आपको पसंद करते है तो कुछ नापसंद। जो आपको नापसंद करते है वो आपको गन्दा इंसान कहेंगे तो क्या आप वाकई गन्दे हो??
हम इस लोक भंवर में फंसे है। आप चाहे कितना भी कोशिश कर लीजिए आप सबके लिए अच्छे नहीं बन सकते। आप अगर बॉलीवुड की मसाला मूवी को तरह थोड़े थोड़े सारे गुण भी रखते है तो भी आप सबके लिए ओषत ही रहेंगे। क्लोज तो नहीं बन सकते ना। क्लोजनेस तो आपके ओरिजिनल रूप से ही आएगी।
धारणा बनाना बहुत आसान है। आप उस व्यक्ति से मिले नहीं, बात की नहीं, वक्त गुजारा नहीं और धारणा बना दी जाती है कि ये वाहियात है। चीप है। अरे आदमी है भाई। धीरे धीरे परते उधेड़ता है। वक्त दो उसको। उसके बाद आपको फील होगा कि असलियत क्या है। क्या वाकई वहीं है जो सुनते आ रहे है।।