मेरे समय के रथ के पहिये ने हैदराबाद शहर को अभी हाल ही में अतीत का हिस्सा बना दिया। हैदराबाद छोड़ने का उतना दुख नहीं जितना इस बात का मलाल है कि हैदराबाद के अधिकाशतः टूरिज्म पॉइंट पर स्टार्लिंग ज्योति के पैर नहीं पड़े। 😊 अब समय मेरे कानों में आकर कह रहा है कि ये गलती बेंगलुरू में मत करना। यहाँ के दर्शनीय स्थल तुम्हारा इंतजार कर रहे है ज्योति। 😀
जो अब भी हैदराबाद में रह रहे है, उनको बताना चाहूंगा कि बिना घूमे चले गए तो जिंदगी भर पछताओगे। आज के 15 साल बाद घूमने का बहाना दूसरा भी आ सकता है लेकिन ये वक्त नहीं आएगा। ये वाली सेल्फी नहीं आएगी। जब आएगी तो 2 बच्चों और बीवी या मोम डेड वाली ही आएगी। 😀#sj_feeling
एक बात ओर .... ये तो कहना ही छोड़ दो की मेरे साथ किसी ओर का वीक ऑफ नहीं होता तो अकेला क्यों घूमूं। इस बात का सबसे अच्छा उत्तर मेरे ही डेस्क के एक साथी Mukund B Kaushal ने दिया था कि अपनी खुशी किसी ओर पर डिपेंड हो तो फिर वो खुशी ही क्या। सबसे तेज भी वहीं चलता है जो अकेला होता है। बेग, सेल्फी स्टिक, छत्ता, पानी की बोतल, कैमरा ओर कुछ खाने के समान के साथ अकेले ही निकल पड़ो। सच में बड़ा अच्छा लगेगा। ज्यादा चीजों को समझोगे। किसी और पर निर्भर नहीं रहोगे। बाकी आपकी मर्जी। धन्यवाद। 😊
No comments:
Post a Comment