आपको ये तो पता होगा कि चितौड़गढ़ के दुर्ग में 3 साके हुए थे। साके मतलब जोहर। एक रानी पद्मनी ने, दूसरा रानी कर्मावती ने और तीसरा कोई रानी ने नही बल्कि सेनापति की पत्नी ने किया। क्योंकि उदयसिंह ने अकबर के आक्रमण के समय अपनी कायरता दिखाई और पहाड़ो पर भाग गए परिवार के साथ। किले को उनके सेनापति जयमल और फत्ता सिसोदिया को सौंपकर।
अकबर और मेवाड़ी सेना के मध्य भीषण युद्ध हुआ। उस युद्ध में जयमल व फत्ता मारे गए। इसके बाद आमेर के शासक भगवंतदास के कहने पर अकबर ने कत्लेआम आदेश जारी किया। कत्लेआम आदेश का मतलब विजय के बाद वहां के आम नागरिकों को मार देना। इस आदेश के तहत 30 हजार लोग मारे गए थे।
अब सवाल उठता है कि आम नागरिकों को मारने वाला ये शक्श महान कैसे हो सकता है?? इसकी महानता पर पशनचिन्ह खड़ा होता है।
अब इस कहानी का दूसरा पहलू सुनिए।
जैसे कोंग्रेस आपातकाल को अपना सबसे बड़ा कलंक मानती है वैसे ही अकबर ने इस कत्लेआम आदेश पर गहरा शोक व्यक्त किया और इसव अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा कलंक माना।
इसी के तहत उसने आगरा के लाल किले के बाहर 2 मुर्तिया लगवाई।
पता है ये मूर्तियां किसकी थी ??
जयमल और फत्ता की।
काफी सैलून तक ये मूर्तियां लगी रही। लेकिन इस महान आदमी के कपूत पोते औरंगजेब ने इन मूर्तियों को तुड़वा दिया।
No comments:
Post a Comment